कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 22, 2007

हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले


हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले,
अजनबी जैसे अजनबी से मिले,

हर वफ़ा एक जुर्म हो गया,
दोस्त कुछ ऎसी बेरुखी से मिले,

फूल ही फूल हमने मांगे थे,
दाग ही दाग जिंदगी से मिले,

जिस तरह आप हम से मिलते हैं,
आदमी यूं न आदमी से मिले,

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