धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो
पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो
Singer: Jagjit Singh
Lyrics: Nida Fazli
आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा
इतना मानूस न हो ख़िलवतेग़म से अपनी
तू कभी खुद को भी देखेगा तो ड़र जायेगा
{मानूस == intimate /familiar, ख़िलवत-ए-ग़म == sorrow of loneliness}
तुम सरेराहेवफ़ा देखते रह जाओगे
और वो बामेरफ़ाक़त से उतर जायेगा
{सर-ए-राह-ए-वफ़ा == path of love, बाम-ए-रफ़ाक़त == responsibility towards love (literal meaning is Terrace (Baam) or Company or Closeness (Rafaaqat)}
ज़िंदगी तेरी अता है तो ये जानेवाला
तेरी बख़्शिश तेरी दहलीज़ पे धर जायेगा
{अता == grant/gift, बख़्शिश == donation, दहलीज़ ==doorstep}
ड़ूबते ड़ूबते कश्ती को उछाला दे दूँ
मै नहीं कोई तो साहिल पे उतर जायेगा
{उछाला ==upward push}
ज़ब्त लाज़िम है मगर दुख है क़यामत का ‘फ़राज़’
ज़ालिम अब के भी न रोयेगा तो मर जायेगा
{लाज़िम == necessary / compulsory}
Singer: Lata Mangeshkar
Lyrics: Ahmed Faraz
रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं
मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं
पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जाना के ख़िलाफ़
और अगर होश की पूछो तो मुझे होश नहीं
अब तो तासीर-ए-ग़म-ए-इश्क़ यहां तक पहुंची
के इधर होश अगर है तो उधर होश नहीं
मेहंद-ए-तस्बीह तो सब हैं मगर इदराक कहां
ज़िंदगी ख़ुद ही इबादत है मगर होश नहीं
मिल के इक बार गया है कोई जिस दिन से ‘जिगर’
मुझको ये वहम है शायद मेरा था दोष (?) नहीं
ये अलग बात है साक़ी के मुझे होश नहीं
वर्ना मै कुछ भी हूं एहसानफ़रामोश नहीं
जो मुझे देखता है नाम तेरा लेता है
मै तो ख़ामोश हूं हालत मेरी ख़ामोश नहीं
कभी उन मदभरी आँखों से पिया था इक जाम
आज तक होश नहीं होश नहीं होश नहीं
Singer: Jagjit Singh
Lyrics: Jigar Moradabadi, Abdul Hameed ‘Adam’
वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो
शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो
जिसने ये दर्द दिया है वो दवा भी देगा
लादवा है जो मेरा दर्द-ए-जिगर होने दो
ज़िक्र रुख़सत का अभी से न करो बैठो भी
जान-ए-मन रात गुज़रने दो सहर होने दो
वस्ल-ए-दुश्मन की ख़बर मुझ से अभी कुछ ना कहो
ठहरो ठहरो मुझे अपनी तो ख़बर होने दो
Singer: Jagjit Singh
हर गोशा गुलिस्तां था कल रात जहां मै था
एक जश्न-ए-बहारां था कल रात जहां मै था
नग़्मे थे हवाओं में जादू था फ़िज़ाओं में
हर साँस ग़ज़लफ़ां था कल रात जहां मै था
दरिया-ए-मोहब्बत में कश्ती थी जवानी की
जज़्बात का तूफ़ां था कल रात जहां मै था
मेहताब था बाहों में जलवे थे निगाहों में
हर सिम्त चराग़ां था कल रात जहां मै था
‘ख़ालिद’ ये हक़ीक़त है नाकर्दा गुनाहों की
मै ख़ूब पशेमां था कल रात जहां मै था
Singer: Jagjit Singh
Lyrics: Khalid Kuwaiti
घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को
रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को
ये ज़बां चलती है नासेह के छुरी चलती है
ज़ेबा करने मुझे आय है के समझाने को
आज कुछ और भी पी लूं के सुना है मैने
आते हैं हज़रत-ए-वाइज़ मेरे समझाने को
हट गई आरिज़-ए-रोशन से तुम्हारे जो नक़ाब
रात भर शम्मा से नफ़रत रही दीवाने को
Singer: Jagjit Singh
एक दीवाने को ये आये हैं समझाने कई
पहले मै दीवाना था और अब हैं दीवाने कई
मुझको चुप रहना पड़ा बस आप का मुंह देखकर
वरना महफ़िल में थे मेरे जाने पहचाने कई
एक ही पत्थर लगे है हर इबादतगाह में
गढ़ लिये हैं एक ही बुत के सबने अफ़साने कई
मै वो काशी का मुसलमां हूं के जिसको ऐ ‘नज़ीर’
अपने घेरे में लिये रहते हैं बुतख़ाने कई
Lyrics:Nazeer Banarasi
Singer: Jagjit Singh
बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या करते हो
और फिर आँख चुराते हो ये क्या करते हो
बाद मेरे कोई मुझ सा ना मिलेगा तुम को
ख़ाक में किस को मिलाते हो ये क्या करते हो
छींटे पानी के ना दो नींद भरी आँखों पर
सोते फ़ितने को जगाते हो ये क्या करते हो
हम तो देते नहीं क्या ये भी ज़बरदस्ती है
छीन कर दिल लिये जाते हो ये क्या करते हो
हो ना जाये कहीं दामन का छुड़ाना मुश्किल
मुझ को दीवाना बनाते हो ये क्या करते हो
Singer: Jagjit Singh
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई – 2
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोः सारी उमर गई- 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई
रंगीन बहारों की ख्वाहिश रही
हाथ मगर कुत्च आया नही- 2
कहने को अपने थे साथी कई
साथ किसीने निभाया नही – 2
कोई भी हमसफ़र नही
खो गई हर डगर कही
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोह सारी उमर गई – 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई
लोगों को अक्सर देखा है
घर के लिए रोते हुए – 2
हम तोः मगर बेघर ही रहे
घरवालों के होते हुए – 2
आया अपना नज़र नही – 2
अपनी जहाँ तक नज़र गई
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोः सारी उमर गई- 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई
पहले तोः हम सुन लेते थे
शोर में भी शेह्नैया- 2
अब तोः हमको लगती है
भीड़ में भी तन्हैया
जीने की हसरत किधर गई – 2
दिल की कली बिखर गई
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोः सारी उमर गई- 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई
Lyrics: Shaily Shailender
Singer: Jagjit Singh
मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम,
आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम,
जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम,
गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी ‘क़तील’,
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम,
Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh