कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

April 11, 2008

खुमारी चढ़ के उतर गई

खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई - 2
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोः सारी उमर गई- 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई

रंगीन बहारों की ख्वाहिश रही
हाथ मगर कुत्च आया नही- 2
कहने को अपने थे साथी कई
साथ किसीने निभाया नही - 2
कोई भी हमसफ़र नही
खो गई हर डगर कही
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोह सारी उमर गई - 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई

लोगों को अक्सर देखा है
घर के लिए रोते हुए - 2
हम तोः मगर बेघर ही रहे
घरवालों के होते हुए - 2
आया अपना नज़र नही - 2
अपनी जहाँ तक नज़र गई
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोः सारी उमर गई- 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई

पहले तोः हम सुन लेते थे
शोर में भी शेह्नैया- 2
अब तोः हमको लगती है
भीड़ में भी तन्हैया
जीने की हसरत किधर गई - 2
दिल की कली बिखर गई
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तोः सारी उमर गई- 2
खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई

Lyrics: Shaily Shailender
Singer: Jagjit Singh

March 21, 2008

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा,
जिनको इक उम्र कलेजे से लगाए रखा,

जिनका हर लफ्ज़ मुझे याद था पानी की तरह,
याद थे मुझको जो पैगाम-ऐ-जुबानी की तरह,
मुझ को प्यारे थे जो अनमोल निशानी की तरह,

तूने दुनिया की निगाहों से जो बचाकर लिखे,
सालाहा-साल मेरे नाम बराबर लिखे,
कभी दिन में तो कभी रात में उठकर लिखे,

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे,
प्यार मे डूबे हुए ख़त मैं जलाता कैसे,
तेरे हाथों के लिखे ख़त मैं जलाता कैसे,

तेरे ख़त आज मैं गंगा में बहा आया हूँ,
आग बहते हुए पानी में लगा आया हूँ,

Singer: Jagjit Singh

ऐसी आंखें नही देखी

ऐसी आंखें नही देखी, ऐसा काजल नही देखा,
ऐसा जलवा नही देखा, ऐसा चेहरा नही देखा,

जब ये दामन की हवा ने, आग जंगल में लगा दे,
जब ये शहरो में जाए, रेत में फूल खिलाये,

ऐसी दुनिया नही देखी, ऐसा मंजर नही देखा,
ऐसा आलम नही देखा, ऐसा दिलबर नही देखा,

उस के कंगन का खड़कना, जैसा बुल-बुल का चहकना,
उस की पाजेब की छम-छम, जैसे बरसात का मौसम,

ऐसा सावन नही देखा, ऐसी बारिश नही देखी,
ऐसी रिम-झिम नही देखी, ऐसी खवाइश नही देखी,

उस की बेवक्त की बाते, जैसे सर्दी की हो राते,
उफ़ ये तन्हाई, ये मस्ती, जैसे तूफान में कश्ती,

मीठी कोयल सी है बोली, जैसे गीतों की रंगोली,
सुर्ख गालों पर पसीना, जैसे फागुन का महीना,

Singer: Jagjit Singh

February 16, 2008

ये हिंदुस्तान है

जिसे लोग कहते है हिंदुस्तान है,
यही अपने खावाबो का प्यारा जहान है,
कई मज्हबो का यहा एक निशान है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

हर एक दिल मे मिटटी की खुशबु बसी है,
ख्यालो मे हर एक के मेहँदी रची है,
अंधेरे उजाले मे ये ज़िंदगी है,
मगर प्यार ही प्यार की रोशनी है,
हमारी मोहब्बत का ये आशियाँ है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

अंधेरो मे जो आज भटके हुए है,
हमारे ही भाई है बहके हुए है,
सही रास्ता उनको दिखलायेंगे हम,
लगायेंगे सिने से समझायेंगे हम,
हमारा चलन तो बड़ा मेहरबान है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

Singer: Jagjit Singh

November 27, 2007

तुम को देखा तो ये ख़याल आया

तुम को देखा तो ये ख़याल आया,
ज़िंदगी धुप तुम घना छाया,

आज फिर दिल ने इक तमन्ना की,
आज फिर दिल को हमने समझाया,

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे,
हमने क्या खोया हमने क्या पाया,

हम जिसे गुनगुना नही सकते,
वक्त ने ऐसा गीत क्यूं गाया,

November 22, 2007

हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले

हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले,
अजनबी जैसे अजनबी से मिले,

हर वफ़ा एक जुर्म हो गया,
दोस्त कुछ ऎसी बेरुखी से मिले,

फूल ही फूल हमने मांगे थे,
दाग ही दाग जिंदगी से मिले,

जिस तरह आप हम से मिलते हैं,
आदमी यूं न आदमी से मिले,

November 21, 2007

रातें थी सूनी सूनी

रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे,
तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे,
खामोश इन लबो को एक रागिनी मिली है,
मुरझाये से गुलो को एक ताजगी मिली है,
घेरे हुए थे मुझ को कब से घने अंधेरे,
रूठा हुआ था मुझसे, खुशियों को है तराना,
लगता था जिंदगानी, बन जायेगी फ़साना,
हर सु लगे हुए थे तन्हाइयो के फेरे,

सर ही न झुका

सर ही न झुका, दिल भी तो झुका,
कल्याण यंही होगा, निर्वाण यही होगा,

इन दीवारों से बातें कर,
मत छलका तू मन का सागर,

जीवन में यह सन्नाटा भर,
फिर कान लगा, कल्याण यंही होगा,

Singer: Jagjit Singh

November 20, 2007

बड़ी नाजुक है

बड़ी नाजुक है ये मंजिल, मोहब्बत का सफर है,
धड़क आहिस्ता से ए दिल, मोहब्बत का सफर है,

कोई सुन ले न ये किस्सा, बहुत डर लगता है,
मगर डरने से क्या हासिल, मोहब्बत का सफर है,

बताना भी नही आसान, छुपाना भी कठिन है,
खुदा अक्सर कदर मुश्किल, मोहब्बत का सफर है,

उजाले दिल के फैले है, चले आओ न जानम,
बहुत ही प्यार के काबिल, मोहब्बत का सफर है,

Singer: Jagjit Singh

November 19, 2007

इश्क क्या है

इश्क क्या है, इश्क इबादत,
इश्क है इमान,

इश्क जगाये, पत्थर में भी,
दिल में हो, जैसे अरमा,

इश्क में मरना, इश्क में जीना,
इश्क का दामन, छोड़ कभी न,

इश्क को जिसने, जान लिया है,
उसने रब को, मान लिया है,

इश्क में खुशियो का मौसम है,
इश्क में आंसू, इश्क में गम है,

इश्क में जो भी खोया,
खो देता, अपनी पहचान,

इश्क सफर है, इश्क मुसाफिर,
इश्क छिपा है, इश्क है जाहिर,

इश्क ग़ज़ल है, इश्क तराना,
इश्क का जादू, सदियों पुराना,

इश्क में दिल खिलते है,
यह दिल हो जाते विरान,

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