कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 9, 2006

कहता है बाबुल


कहता है बाबुल, ओ मेरी बिटिया,
तु तो है मेरे, जिगर की चिठिया,

कहता है बाबुल, ओ मेरी बिटिया,
तु तो है मेरे, जिगर की चिठिया,
डाकिया कोई जब आयेगा,
तुझको चुरा के ले जायेगा,

कटेगा कैसे लम्हा, तेरे बिना बता,
जियुंगा कैसे तन्हा, तेरे बिना बता,
कटेगा कैसे लम्हा, तेरे बिना बता,
जियुंगा कैसे तन्हा, तेरे बिना बता,

तु सुहागन रहे, संग साजन रहे रात दिन,
इस खुशी के लिये, हर सितम मै उठ्ठा लूंगा,
तेरे जाने का गम मुझको होगा मगर लाडली,
लेके इस दर्द को मै सदा मुस्कुराउगा,

बाबुल तो दिल से दे रहा दुआ यही,
खुशी के साये मै हो ज़िन्दगी तेरी,
बाबुल टो डिल् से डे रह दुआ यहि,
खुशी के साये मै हो ज़िन्दगी तेरी,

वक़्त के साथ ये ज़ख्म भर जायेगा,
पल गुज़र जायेगा तु मेरी बात मान ले,
यादो के आसरे उम्र कटती नही,
है हकिकत यही, अब तु जान ले,

समुंदरो का पानी कोई ना पी सका,
समुंदरो का पानी कोई ना पी सका,
आकेला खारा जीवन कोई ना जी सका,

कहता है बाबुल, ओ मेरी बिटिया,
तु तो है मेरे, जिगर की चिठिया,
डाकिया कोई जब आयेगा,
तुझको चुरा के ले जायेगा,

कटेगा कैसे लम्हा, तेरे बिना बता,
जियुंगा कैसे तन्हा, तेरे बिना बता,
कटेगा कैसे लम्हा, तेरे बिना बता,
जियुंगा कैसे तन्हा, तेरे बिना बता,

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