कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

November 20, 2007

तुम हमारे नही तो क्या गम है

तुम हमारे नही तो क्या गम है,
हम तुम्हारे तो है यह क्या कम है,
हुस्न की शोखिया ज़रा देखो,
गाहे शोला है गाहे शबनम है,
मुस्कुरा दो ज़रा खुदा के लिए,
शम-ऐ-मफिल में रौशनी कम है,
बन गया है यह ज़िंदगी अब तो,
तुझ से बढकर हमे तेरा गम है,

फूल भरे है दामन दामन

फूल भरे है दामन दामन,
लेकिन वीरान गुलशन गुलशन,
अक्ल की बातें करने वाले,
क्या समझेगे दिल की धड़कन,
कौन किसी के दुःख का साथी,
आपने आसू अपना दामन,
तेरा दामन छोडू कैसे,
मेरी दुनिया तेरा दामन,

आखो से यूं आंसू

आखो से यूं आंसू ढलके,
सागर से जैसे मए छलके
हम समझे मफ्हुम-ऐ-भरा,
कोई आया भेष बदल के,
काश बता सकते परवाने,
क्या खोया, क्या पाया जलके
मंजिल तक वो क्या पहुचा,
जिसने देखि राह न चलके,

उठा सुराही

उठा सुराही ले शीशा-ओ-जाम साकी,
फिर इसके बाद खुदा का भी नाम ले साकी,
फिर इसके बाद हमे तिशनगी रहे न रहे,
कुछ और देर मुरवत से काम ले साकी,
फिर इसके बाद जो होगा वो देखा जाएगा,
अभी तो पीने पिलाने से काम ले साकी,
तेरे हजूर में होश-ओ-खिरद से क्या हासिल,
नही है मए तो निगाहों से काम ले साकी,

November 19, 2007

हुस्न वालो का ऐतराम करो

हुस्न वालो का ऐतराम करो,
कुछ तो दुनिया मे नेक काम करो,
शेख जी आये है बव्जू होकर,
अब तो पीने का इन्तेजाम करो,
अभी बरसेंगे हर तरफ़ जलवे,
तुम निगाहों का एह्त्माम करो,
लोग डरने लगे गुनाहों से,
बारिश-ऐ-रहमत-ऐ-तमाम करो,

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