अब के बरस भी वो नही आया बहार में,
गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में,
ये आग इश्क की है बुझाने से क्या बुझे,
दिल तेरे बस में है न मेरे इख्तियार में,
है टूटे दिल में तेरी मोहब्बत तेरा ख़याल,
खुश-रंग है बहार जो गुजारी बहार में,
आंसू नही है आंखों में लेकिन तेरे बगैर,
वो कापते हुए हैं दिल-ऐ-बेकरार में,


