कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 22, 2007

बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है


बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है,
ज़िंदगी तेरी एक-एक अदा जुर्म है,

ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर,
अपने बारे में कुछ सोचना जुर्म है,

याद रखना तुझे मेरा एक जुर्म था,
भूल जाना तुझे दूसरा जुर्म है,

क्या सितम है के तेरे हसीन शहर में,
हर तरफ़ गौर से देखना जुर्म है,

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