कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 16, 2006

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी


हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तनहाईयों का शिकार आदमी

सुबह से श्याम तक बोझ ढाता हुआ
अपनी ही लाश पर खुद मजार आदमी

हर तरफ़ भागते दौडते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी

रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ
हर नए दिन नया इंतजार आदमी

जिंदगी का मुकद्दर सफ़र दर सफ़र
आखरी सांस तक बेकरार आदमी

Theme: Rubric. Blog at WordPress.com.

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 31 other followers