कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 30, 2007

रात खामोश है चाँद मदहोश है


रात खामोश है चाँद मदहोश है,
थाम लेना मुझे जा रहा होश है,

मिलन की दास्ताँ धडकनों की जुबान,
गा रही है ज़मीन सुन रहा आसमान,

गुनगुनाती हवा दे रही है सदा,
सर्द इस रात की गर्म आगोश है,

महकती यह फिजा जैसे तेरी अदा,
छा रहा रूह पर जाने कैसा नशा,

झूमता है जहाँ अजब है यह समां,
दिल के गुलज़ार मे इश्क पुरजोश है,

अक्टूबर 27, 2007

गुम सुम ये जहाँ है


गुम सुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है,
गम्ज़दा हो गई, ज़िंदगी आ भी जा,

रात बैठी है बाहे पसारे, सिस्किया ले रहे है सितारे,
कोई टुटा हुआ दिल पुकारे, हमदम तू कहाँ है,

आज आने का वादा भुला कर, नाउमीदी की आंधी चला कर,
आशियाना वफ़ा का जला कर, हमदम तू कहाँ है,

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