तोड़कर अहद-ए-करम नाआशना हो जाइये,
बंदापरवर जाइये अच्छा ख़फ़ा हो जाइये,
राह में मिलिये कभी मुझ से तो अज़राह-ए-सितम,
होंठ अपने काटकर फ़ौरन जुदा हो जाइये,
जी में आता है के उस शोख़-ए-तग़ाफ़ुल केश से,
अब ना मिलिये फिर कभी और बेवफ़ा हो जाइये,
हाये रे बेइख़्तियारी ये तो सब कुछ हो मगर,
उस सरापानाज़ से क्यूंकर ख़फ़ा हो जाइये,
Lyrics: Hasrat Mohani
Singre: Jagjit Singh


