कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मई 21, 2012

चाँद से फूल से


चाँद से फूल से या मेरी जुबां से सुनिए,
हर तरफ आप का किसा जहां से सुनिए,

सब को आता है दुनिया को सता कर जीना,
ज़िंदगी क्या मुहब्बत की दुआ से सुनिए,

मेरी आवाज़ पर्दा मेरे चहरे का,
मैं हूँ खामोश जहां मुझको वहां से सुनिए,

क्या ज़रूरी है की हर पर्दा उठाया जाए,
मेरे हालात अपने अपने मकान से सुनिए..

मई 17, 2012

तन्हा-तन्हा हम रो लेंगे


तन्हा-तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल-महफ़िल गायेंगे,
जब तक आंसू साथ रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे,

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं,
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे,

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो,
चार किताबे पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे,

किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता आसान है,
हम जब थक कर रुक जायेंगे, औरों को समझायेंगे,

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर दिल हों मुमकिन है,
हम तो उस दिन रायें देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे..

न शिवाले न कालिस न हरम


न शिवाले न कालिस न हरम झूठे हैं,
बस यही सच है के तुम झूठे हो हम झूठे हैं,

हमने देखा ही नहीं बोलते उनको अब तक,
कौन कहता है के पत्थर के सनम झूठे हैं,

उनसे मिलिए तो ख़ुशी होती है उनसे मिलकर,
शहर के दुसरे लोगों से जो कम झूठे हैं,

कुछ तो है बात जो तहरीरों में तासीर नहीं,
झूठे फनकार नहीं हैं तो कलम झूठे हैं..

क्या खबर थी इस तरह से


क्या खबर थी इस तरह से वो जुदा हो जाएगा,
ख्वाब में भी उसका मिलना ख्वाब सा हो जाएगा,

ज़िन्दगी थी क़ैद हम-में क्या निकालोगे उसे,
मौत जब आ जायेगी तो खुद रिहा हो जाएगा,

दोस्त बनकर उसको चाहा ये कभी सोचा न था,
दोस्ती ही दोस्ती में वो खुदा हो जाएगा,

उसका जलवा होगा क्या जिसका के पर्दा नूर है,
जो भी उसको देख लेगा वो फ़िदा हो जाएगा..

खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे


खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे,
के अपने सिवा कुछ दिखाई न दे,

खतावार समझेगी दुनिया तुझे,
के इतनी जियादा सफाई न दे,

हंसो आज इतना के इस शोर में,
सदा सिसकियों की सुनायी न दे,

अभी तो बदन में लहू है बहुत,
कलम छीन ले रोशनाई न दे,

खुदा ऐसे एहसास का नाम है,
रहे सामने और दिखाई न दे..

मई 15, 2012

कभी यूंह भी आ मेरी आँख में


कभी यूंह भी आ मेरी आँख में,
के मेरी नज़र को खबर न हो,
मुझे एक रात नवाज़ दे,
मगर उस के बाद सहर न हो,

वोह बड़ा रहीम-ओ-करीम है,
मुझे यह सिफत भी अत करे,
तुझे भूलने की दुआ करू,
तो दुआ में मेरी असर न हो,

कभी दिन की धुप में जहम के,
कभी शब् के फूल को चूम के,
यूंह ही साथ साथ चले सदा,
कभी ख़त्म आपना सफ़र न हो,

मेरे पास मेरे हबीब आ,
जरा और दिल के करीब आ,
तुझे धडकनों में बसा लू में,
के बिचादने का कभी दार न हो..

मई 13, 2012

धुप है क्या और साया क्या


धुप है क्या और साया क्या है अब मालूम हुआ,
ये सब खेल तमाशा क्या है अब मालूम हुआ,

हँसते फूल का चेहरा देखूं और भर आई आँख,
अपने साथ ये किस्सा क्या है अब मालूम हुआ,

हम बरसों के बाद भी उनको अब तक भूल न पाए,
दिल से उनका रिश्ता क्या है अब मालूम हुआ,

सेहरा सेहरा प्यासे भटके सारी उम्र जले,
बादल का इक टुकड़ा क्या है अब मालूम हुआ..

देखा जो आइना तो मुझे सोचना पड़ा


देखा जो आइना तो मुझे सोचना पड़ा,
खुद से न मिल सका तो मुझे सोचना पड़ा,

उसका जो ख़त मिला तो मुझे सोचना पड़ा,
अपना सा वो लगा तो मुझे सोचना पड़ा,

मुझको था गुमान के मुझी में है एक अना,
देखा तेरी अना तो मुझे सोचना पड़ा,

दुनिया समझ रही थी के नाराज़ मुझसे है,
लेकिन वो जब मिला तो मुझे सोचना पड़ा,

इक दिन वो मेरे ऐब गिनाने लगा करार,
जब खुद ही थक गया तो मुझे सोचना पड़ा..

ऐसे हिज्र के मौसम


ऐसे हिज्र के मौसम तब तब आते हैं,
तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं,

जादू की आँखों से भी देखो दुनिया को,
ख़्वाबों का क्या है वो हर सब आते हैं,

अब के सफ़र की बात नहीं बाक़ी वरना,
हम को बुलाएं दस्त से जब वो आते हैं,

कागज़ की कस्थी में दरिया पार किया,
देखो हम को क्या क्या करतब आते हैं..

मई 12, 2012

ना मुहब्बत ना दोस्ती के लिए


ना मुहब्बत ना दोस्ती के लिए,
वक़्त रुकता नहीं किसी के लिए,

दिल को अपने सज़ा न दे यूं ही,
सोच ले आज दो घडी के लिए,

हर कोई प्यार ढूढता है यहाँ,
अपनी तन्हा सी ज़िंदगी के लिए,

वक़्त के साथ साथ चलता रहे,
यही बेहतर है आदमी के लिए..

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