कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 10, 2006

बदला ना अपने आप को जो थे वही रहे


बदला ना अपने आप को जो थे वही रहे
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे

ढुनिया न जीत पाओ तो हारो न खुद को तुम
थोड़ी बहुत तो ज़हन मे नाराज़गी रहे

अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी
हम जिसके भी करीब रहे दुर ही रहे

गुज़रो जो बाग से तो दुआ मांगते चलो
जिसमे खिले है फुल वो डाली हरी रहे

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