कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 12, 2006

जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलोना है


जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलोना है
दो आँखो मे एक से हसँना एक से रोना है

जो जी चाहे वो मिल जाये कब ऐसा होता है
हर जीवन जीवन जीने का समझौता है
अब तक जो होता आया है वो ही होना है

रात अन्धेरी भोर सुहानी यही ज़माना है
हर चादर मे दुख का ताना सुख का बाना है
आती साँस को पाना जाती साँस को खोना है

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