कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 14, 2006

आए हैं समझाने लोग


आए हैं समझाने लोग
हैं कितने दीवाने लोग

दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता
क्यूं जाते मैखाने लोग

(दैर-ओ-हरम : temple and the mosque; चैन : solace; मैखाने : tavern, wine-house)

जान के सब कुछ कुछ भी ना जाने
हैं कितने अन्जाने लोग

(अन्जाने : strangers)

वक़्त पे काम नहीं आते हैं
ये जाने पहचाने लोग

अब जब मुझको होश नहीं है
आए हैं समझाने लोग

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं


बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं

तबीयत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में
हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं

मेरी नज़रें भी ऐसे क़ातिलों का जान-ओ-ईमान है
निगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं

(नज़रें : eyes, glances; क़ातिल : murderer; जान-ओ-ईमान : life and belief)

‘फिराक़’ बदल कर भेष मिलता है कोई क़ाफ़िर
कभी हम जान लेते हैं कभी पहचान लेते हैं

(क़ाफ़िर : non-believer)

दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये


दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये
ये ज़मीं आसमाँ ना हो जाये

(फुगाँ : lamentation; ज़मीं : earth; आसमाँ : sky)

दिल में डूबा हुआ जो नश्तर है
मेरे दिल की ज़ुबाँ ना हो जाये

(नश्तर : dagger; ज़ुबाँ : voice)

दिल को ले लीजिए जो लेना हो
फिर ये सौदा गराँ ना हो जाये

(सौदा : bargain; गराँ : costly)

आह कीजिए मगर लतीफ़-तरीन
लब तक आकर धुआँ ना हो जाये

(आह : sigh; लतीफ़-तरीन : pleasant; धुआँ : smoke)

कोई पास आया सवेरे सवेरे


कोई पास आया सवेरे सवेरे
मुझे आज़माया सवेरे सवेरे

(आज़माया : tested)

मेरी दास्तां को ज़रा सा बदल कर
मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे

(दास्तां : story)

जो कहता था कल संभलना संभलना
वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे

कटी रात सारी मेरी मयकदे में
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे

(मयकदे में : in winehouse, tavern)

जब कभी तेरा नाम लेते है


जब कभी तेरा नाम लेते है
दिल से हम इन्तिक़ाम लेते है

(इन्तिक़ाम : revenge)

मेरे बरबादियों के अफ़साने
मेरे यारों के नाम लेते है

(अफ़साने : tales, stories)

बस यही एक जुर्म है अपना
हम मोहब्बत से काम लेते है

(जुर्म : crime)

हर कदम पर गिरे मगर सीखा
कैसे गिरतों को थाम लेते है

हम भटककर जुनूँ की राहों मे
अक़्ल से इंतिकाम लेते है

(जुनूँ : frenzy, madness; अक़्ल : mind, intellect)

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं


दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं
मिल जाये तो मिट्टी हैं खो जाये तो सोना है

अच्छा सा कोई मौसम तन्हा सा कोई आलम
हर वक़्त का ये रोना तो बेकार का रोना हैं

(तन्हा : lonely; आलम : grief, pain, misfortune)

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना हैं किस छत को भिगौना हैं

ग़म हो कि ख़ुशी दोनो कुछ देर के साथी हैं
फिर रास्ता ही रास्ता हैं हंसना है ना रोना हैं

(ग़म : grief, suffering)

हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे


हर सू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे
क्या-क्या फरेब देती है मेरी नज़र मुझे

(हर सू : in every direction; जलवागर : manifest, splendid; फरेब : tricks; नज़र : sight, vision)

डाला है बेखुदी ने अजब राह पर मुझे
आखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे

(बेखुदी : unconsciousness)

दिल ले के मेरा देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे

(दाग़-ए-जिगर : burnt marks on the soul [actually liver, but that is so un-romantic!])

आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे

(नाला-ए-दिल : tears and lamentation of the heart; असर : effect; ख़बर : knowledge, information, gnosis)

तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं


तुम नहीं ग़म नहीं शराब नहीं
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं

(ग़म : grief, pain; तन्हाई : loneliness, solitude)

गाहे-गाहे इसे पढा कीजे
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं

(गाहे-गाहे : once in a while)

जाने किस किस की मौत आयी है
आज रुख़ पर कोई नक़ाब नहीं

(रुख : face; नक़ाब : veil)

वो करम उन्गलियों पे गिरते हैं
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं

(करम : good deeds, favours; हिसाब : calculation)

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है


कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

( ज़ुबाँ : tongue, voice; हक़ीक़त : reality, truth; निगाहों से : through eyes; बयाँ : be described)

वो ना आये तो सताती है एक ख़लिश दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है

(ख़लिश : anxiety, apprehension; जवाँ : youthful)

रूह को शाद करे दिल को पुर-नूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है

(रूह : soul; शाद : make happy, please; पुर-नूर : fill with lighten, luminous; नज़ारे : visions; तनवीर : illumination)

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोके
दिल में जो बात हो आखों से बयाँ होती है

(ज़ब्त : patience, restraint; सैलाब-ए-मुहब्बत : flood of love)

ज़िन्दगी एक सुलगती सी चिता है “साहिर”
शोला बनती है ना ये बुझ के धुआँ होती है

(चिता : funeral pyre)

इश्क में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने ना दिया


इश्क में ग़ैरत-ए-जज़्बात ने रोने ना दिया
वरना क्या बात थी किस बात ने रोने ना दिया

(ग़ैरत-ए-जज़्बात : pride of the emotions)

आप कहते थे के रोने से ना बदलेंगे नसीब
उम्र भर आपकी इस बात ने रोने ना दिया

रोने वालों से कह दो उनका भी रोना रो लें
जिनको मजबूरी-ए-हालात ने रोने ना दिया

(मजबूरी-ए-हालात : constraints)

तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था
तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने ना दिया

(तन्गी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात : scarcity of the time of meeting)

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