कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 14, 2006

दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये


दर्द बढ कर फुगाँ ना हो जाये
ये ज़मीं आसमाँ ना हो जाये

(फुगाँ : lamentation; ज़मीं : earth; आसमाँ : sky)

दिल में डूबा हुआ जो नश्तर है
मेरे दिल की ज़ुबाँ ना हो जाये

(नश्तर : dagger; ज़ुबाँ : voice)

दिल को ले लीजिए जो लेना हो
फिर ये सौदा गराँ ना हो जाये

(सौदा : bargain; गराँ : costly)

आह कीजिए मगर लतीफ़-तरीन
लब तक आकर धुआँ ना हो जाये

(आह : sigh; लतीफ़-तरीन : pleasant; धुआँ : smoke)

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