कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 14, 2006

कोई पास आया सवेरे सवेरे


कोई पास आया सवेरे सवेरे
मुझे आज़माया सवेरे सवेरे

(आज़माया : tested)

मेरी दास्तां को ज़रा सा बदल कर
मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे

(दास्तां : story)

जो कहता था कल संभलना संभलना
वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे

कटी रात सारी मेरी मयकदे में
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे

(मयकदे में : in winehouse, tavern)

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