कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 14, 2006

यार ने मुझको मुझे यार ने सोने ना दिया


यार ने मुझको मुझे यार ने सोने ना दिया
रात भर ताल-ए-बेदार ने सोने ना दिया

(ताल-ए-बेदार : like a thorn)

एक शब बुलबुल-ए-बेताब के जागे ना नसीब
पहलू-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने ना दिया

(शब : night; बुलबुल-ए-बेताब : restless nigtingale; पहलू-ए-गुल : in the company of flowers; ख़ार : thorns)

रात भर की दिल-ए-बेताब ने बातें मुझसे
मुझको इस इश्क के बीमार ने सोने ना दिया

(दिल-ए-बेताब : restless heart)

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