कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 16, 2006

आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक


आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक।

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।

हम ने माना कि तग़ाफुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको ख़बर होने तक।

ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।


सब्र-तलब = Desiring/Needing Patience
तग़ाफुल = Ignore/Neglect
जुज़ = Except/Other than
मर्ग = Death
शमा = Lamp/Candle
सहर = Dawn/Morning

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2 टिप्पणियाँ »

  1. great….
    i m fan of jagjit ji… mirza galib is one of my favourte ….

    wah khoob…

    टिप्पणी द्वारा harijoshin — मार्च 23, 2009 @ 4:12 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. what is meaning of ज़ुल्फ़ के सर

    टिप्पणी द्वारा shivesh namdeo — फ़रवरी 13, 2010 @ 3:46 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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