कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 16, 2006

एक ना एक शम्मा जलाये रखिये


एक ना एक शम्मा अन्धेरे में जलाये रखिये
सुब्ह होने को है माहौल बनाये रखिये

(शम्मा : lamp, candle-light; सुब्ह : morning; माहौल : environment)

जिन के हाथों से हमें ज़ख्म-ए-निहाँ पहुँचे हैं
वो भी कहते हैं के ज़ख्मों को छुपाये रखिये

(ज़ख्म-ए-निहाँ : concealed wounds)

कौन जाने के वो किस राह-गुज़र से गुज़रे
हर गुज़र-गाह को फूलों से सजाये रखिये

(राह-गुज़र : pathway; गुज़र-गाह : pathway)

दामन-ए-यार की ज़ीनत ना बने हर आँसू
अपनी पलकों के लिए कुछ तो बचाये रखिये

(दामन-ए-यार : lap of the beloved; ज़ीनत : ornament, decoration)

Advertisements

टिप्पणी करे »

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं ।

RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

WordPress.com पर ब्लॉग.

%d bloggers like this: