कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 23, 2006

आप अगर इन दिनो यहाँ होते


आप अगर इन दिनो यहाँ होते
हम ज़मीन पर भला कहाँ होते
आप अगर इन दिनो यहाँ होते

वक़्त गुज़्रा नही अभी वरना
रेत पर पाँव के निशाँ होते

मेरे आगे नही था अगर कोई मेरे
पीछे तो कारवा होते

तेरे साहिल पे लौट कर आती
अगर उम्मीदो के बादबा होते

आप अगर इन दिनो यहाँ होते
हम ज़मीन पर भला कहाँ होते
आप अगर इन दिनो यहाँ होते

4 टिप्पणियाँ »

  1. sand mi jagjit kaveta plz
    love kaveta sand

    टिप्पणी द्वारा joney kumar — अप्रैल 20, 2007 @ 12:32 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. i like murmurry voice of Jagjit singh

    टिप्पणी द्वारा sourabh — जून 6, 2007 @ 5:34 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. Amazing and mystery of voice.

    I have no words to praise voice of Jagjit singh and It is beyond everything when i listen and understand his Ghazal,.

    It feels did he sung it for me? it feels he sung it just for me!

    टिप्पणी द्वारा Dr.krnav shah — जून 7, 2007 @ 7:41 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. Sorry me a Duh when it comes to Urdu can some explain me the lines

    तेरे साहिल पे लौट कर आती
    अगर उम्मीदो के बादबा होते

    टिप्पणी द्वारा Rims — नवम्बर 4, 2010 @ 4:16 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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