कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 25, 2006

फुलों की तरह लब खोल कभी


फुलों की तरह लब खोल कभी
ख़ूश्बू की ज़ुबा मे बोल कभी
अलफ़ाज़ परखता रेहता है
आवाज़ हमारी तोल कभी
अन्मोल नहीं लेकिन फिर भी
पूछो तो मुफ़्त का मोल कभी
खिड़की में कटी है सब राते
कुछ चौर्स थीं, कुछ गोल कभी
ये दिल भी दोस्त ज़मीं की तरह
हो जाता है डांवां डोल कभी

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