कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 27, 2006

नज़र नज़र से मिलाकर

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 4:15 अपराह्न

नज़र नज़र से मिलाकर शराब पीते हैं
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं।

इसीलिए तो अँधेरा है मैकदे में बहुत
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं।

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता
तुम्हें नज़र में सजा कर शराब पीते हैं।

उन्हीं के हिस्से आती है प्यास ही अक्सर
जो दूसरों को पिला कर शराब पीते हैं।

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2 टिप्पणियाँ »

  1. Bahut hi Badiya collection hai ,Amerpreet Singh Ji ,bahut bahut dhanyawad jo aapne jagjit singh ki sari gazal ek sath rakhi .

    टिप्पणी द्वारा Manoj — अक्टूबर 28, 2006 @ 4:35 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. this is incredible work , will go down in history as great work in translating ghazals for younger generation ..

    टिप्पणी द्वारा Manish Sharma — जनवरी 7, 2009 @ 12:25 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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