कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 27, 2006

सहमा सहमा


सहमा सहमा डरा सा रहता है
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है
सहमा सहमा डरा सा रहता है

इश्क में और कुछ नहीं होता
आदमी बावरा सा रहता है
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है
सहमा सहमा डरा सा रहता है

एक पल देख लूँ तो उठता हूँ
एक पल देख लूँ
एक पल देख लूँ तो उठता हूँ
जल गया सब जरा सा रहता है
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है
सहमा सहमा डरा सा रहता है

चाँद जब आसमाँ पे आ जाए
आप का आसरा सा रहता है
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है
सहमा सहमा डरा सा रहता है
सहमा सहमा डरा सा रहता है

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2 टिप्पणियाँ »

  1. Excellent, Marvellous, awsome, Keep it up. Please feel free to mail me.
    Sameer
    Webmaster
    Times of ndia [Mumbai]

    टिप्पणी द्वारा Sameer — जून 16, 2007 @ 5:55 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. har pal kuch khamosh sa rheta hai….
    jindagi ka kuch hissa shema sa rheta hai…
    muskuraati rheti hu mein…
    par haa meri akh mei bhi assu ka katra sa rheta hai…
    shema shema ha dil kuch dara sa rheta hai…

    टिप्पणी द्वारा Arti Gupta — अप्रैल 28, 2013 @ 9:08 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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