कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 30, 2006

है लौ ज़िंदगी


है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

कभी सामने आता मिलने उसे
बड़ा नाम् उसका है मशहूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

भवर पास है चल पहन ले इसे
किनारे का फदा बहुत दूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

सुना है वो ही करने वाला है सब
सुना है के इंसान मज़बूर है

है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
मगर इस पे जलने का दस्तूर
है लौ ज़िंदगी

Advertisements

9 टिप्पणियाँ »

  1. koi baat chale ………………
    magar khamoshi se

    टिप्पणी द्वारा Anil jeengar — अक्टूबर 30, 2006 @ 7:08 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. I think the song should be:

    Hai Lau Zindagi (Life is fire)

    I know this song was written for a TV serial “Hello Zindagi”, but I loved it when I heard the song cause this only shows the brilliance of Gulzar to use the language and the variation of language so brilliantly.

    Nice site.

    टिप्पणी द्वारा Rajesh Kumar — नवम्बर 17, 2006 @ 7:39 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. HAI LAU JINGAGI

    Jindagi ko is gazal me is khubsurati baya karana apane aapme ek misal hai.
    thanks to Shri Gulzar for this sunder gazal

    टिप्पणी द्वारा Anand karambe — नवम्बर 22, 2006 @ 9:58 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  4. Does anyone have the ghazal “hai lau zindagi” in mp3 or wav or any other format..

    Thanks in advance…If yeyes please maili shahidr100@gmail.com

    टिप्पणी द्वारा Shahid — दिसम्बर 14, 2006 @ 3:28 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  5. i also want this song plz send it to my e mail vishsanjiv@yahoo.com

    टिप्पणी द्वारा sanjeev — मार्च 9, 2007 @ 4:16 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  6. Do send me an email and i will let you have it

    टिप्पणी द्वारा Amit — मार्च 10, 2007 @ 7:29 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  7. I like this gazal. “HAI LAU JINGAGI”
    i m Fun Gulzar & Jagjit Singh..

    टिप्पणी द्वारा Setu — मई 11, 2007 @ 6:13 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  8. Hi, Can someone send me a copy of this ghazal please!!
    Manjinder

    टिप्पणी द्वारा manjinder — जून 11, 2008 @ 11:25 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  9. अधूरी से रिश्तों में पलते रहो
    अधूरी सी सांसो में जलते रहो
    मगर जिए जाने का दस्तूर है

    है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है
    मगर इस पे जलने का दस्तूर है

    टिप्पणी द्वारा maneesh — दिसम्बर 23, 2008 @ 1:16 अपराह्न | प्रतिक्रिया


RSS feed for comments on this post. TrackBack URI

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

WordPress.com पर ब्लॉग.

%d bloggers like this: