कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 20, 2006

तमन्ना फ़िर मचल जाये


तमन्ना फ़िर मचल जाये,
अगर तुम मिलने आ जाओ,
यह मौसम ही बदल जाये,
अगर तुम मिलने आ जाओ,

मुझे गम है कि मैने,
ज़िन्दगी मे कुछ नहीं पाया,
यह गम दिल से निकल जाये,
अगर तुम मिलने आ जाओ,

नहीं मिलते हो मुझसे तुम,
तो सब हमदर्द हैं मेरे,
ज़माना मुझसे जल जाये,
अगर तुम मिलने आ जाओ,

यह दुनिया भर के झगडे,
घर के किस्से काम की बातें,
बला हर एक टल जाये,
अगर तुम मिलने आ जाओ

1 टिप्पणी »

  1. It would be better if poet’s name was also provided.

    टिप्पणी द्वारा Mukesh Dutt — मार्च 14, 2007 @ 1:36 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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