कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 20, 2006

उम्र जलवों में बसर हो

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Live at Wembley — Amarjeet Singh @ 12:02 अपराह्न

उम्र जलवों में बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं,
हर शब-ए-गम की सहर हो ये ज़रूरी तो नहीं,

चश्म-ए-साकी से पियो या लब-ए-सगर से पियो,
बेखुदी आठों पहर हो ये ज़रूरी तो नहीं,

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है,
उनकी आगोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं,

शेख करता तो है मस्ज़िद में खुदा को सज़दे,
उसके सज़दों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं,

सबकी नज़रों में हो साकी ये ज़रूरी है मगर,
सब पे साकी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं,

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1 टिप्पणी »

  1. lot of thanks, from lot of years I was searching this Gazal

    plz tell me how I can listen it with music in the voice of great jagjitsingh

    thanks a lot

    Regards

    NITIN ANDANI

    टिप्पणी द्वारा Nitin Andani — फ़रवरी 12, 2009 @ 5:51 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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