कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

मई 19, 2007

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला


मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला ।
अगर गले नही मिलता तो हाथ भी ना मिला ।

घरों में नाम थे नामों के साथ ओहदे थे ,
बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला ।

तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड आया था ,
फिर उसके बाद मुझे कोई अजबनबी ना मिला ।

बहुत अजीब हैं ये कुरबतों की दुरी भी ,
वो मेरे साथ था और मुझे कभी ना मिला ।

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