कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 11, 2007

कभी कभी यूं भी हमने अपने जीं को बहलाया है

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 6:48 अपराह्न

कभी कभी यूं भी हमने अपने जीं को बहलाया है,
जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है,

हमसे पूछो इज़्ज़त वालो की इज़्ज़त का हाल यहाँ,
हमने भी इस शहर में रहकर थोड़ा नाम कमाया है,

उस से बिछडे बरसों बीते लेकिन आज न जाने क्यूँ,
आँगन में हसते बच्चों को बेकारों धमकाया है,

कोई मिला तो हाथ मिलाया कहीं गए तो बातें की,
घर से बाहर जब भी निकले दिन भर बोझ उठाया है,

झूम के जब रिन्दो ने पिला दी

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 6:34 अपराह्न

झूम के जब रिन्दो ने पिला दी,
शेख़ ने चुपके चुपके दुआ दी,

एक कमी थी ताजमहल में,
हमने तेरी तस्वीर लगा दी,

आपने झूठा वादा करके,
आज हमारी उम्र बढ़ा दी,

तेरी गली में सजदे करके,
हमने इबादतगाह बना दी,

आप आए जनाब बरसों मे

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 4:44 अपराह्न

आप आए जनाब बरसों मे,
हमने पी है शराब बरसों मे,

फिर से दिल की कली खिली अपनी,
फिर से देखा शबाब बरसों मे,

तुम कहाँ थे कहाँ रहे साहिब,
आज होगा हिसाब बरसों मे,

पहले नादाँ थे अब हुए दाना,
उनको आया आदाब बरसों मे,

इसी उम्मीद पे में जिंदा हूँ,
क्या वो देंगे जवाब बरसों मे,

ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 4:33 अपराह्न

ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं,
जहाँ से दूर ये ख़ुद के क़रीब होते हैं,

किसी को प्यार मिले और किसी को रुसवाई,
मोहब्बतों के सफर भी अजीब होते हैं,

मिला किसी को है क्या सोचिये अमीरी से,
दिलो के शाह तो अक्सर गरीब होते हैं,

यहाँ के लोगो की है खासियत ये सबसे बड़ी,
हबीब लगते हैं लेकिन रकीब होते हैं,

किसने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 3:47 अपराह्न

किसने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी,
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी,

कोई मतवाली घटा पीके जवानी की उमंग,
जी बहा ले गया बरसात का पहला पानी,

टिकटिकी बांधे वो फिरते हैं मे इस फिक्र मे हूँ,
कहीं खाने लगे चक्कर न ये गहरा पानी,

बात करने मे वो उन आंखों से अमृत टपका,
आरजू देखते ही मुँह मे भर आया पानी,

दर्द-ऐ-दिल मे कमी न हो जाए

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 3:05 अपराह्न

दर्द-ऐ-दिल मे कमी न हो जाए,
दोस्ती दुश्मनी न हो जाए,

तुम मेरी दोस्ती का दम न भरो,
आसमान मुद्दई न हो जाए,

बैठता हूँ हमेशा रिन्दों मे,
कहीं ज़ाहिद वाली न हो जाए,

अपने खूये वफ़ा से डरता हूँ,
आशिकी बंदगी न हो जाए,

आप को देखकर देखता रह गया

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 2:32 अपराह्न

आप को देखकर देखता रह गया,
क्या कहूं और कहने को क्या रह गया,

उनकी  आंखों मे कैसे छलकने लगा,
मेरे होंठों  पे जो माजरा रह गया,

ऐसे बिछडे सभी राह के मोड़ पर,
आखरी हमसफर रास्ता रह गया,

सोच कर आओ खुये तमन्ना है ये,
जानेमन जो यहाँ रह गया रह गया,

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