कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 13, 2007

सर झुकाओगे तो

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 4:15 अपराह्न

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा,

हम भी दरिया हैं हमे अपना हुनर मालूम है,
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा,

मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों,
ज़हर भी इसमे अगर होगा दवा हो जायेगा,

रूठ जाना तो मोहब्बत की अलामत है मगर,
क्या ख़बर थी मुझसे वो इतना खफा हो जायेगा,

न कह साकी बहार आने के दिन हैं

Filed under: Albums,गज़ल,जगजीत सिहँ,Ghazal,Jagjit Singh,Visions — Amarjeet Singh @ 1:31 अपराह्न

न कह साकी बहार आने के दिन हैं,
जिगर के दाग छिल जाने के दिन हैं,

अदा से खूब अदा आने के दिन हैं,
अभी तो दूर शर्माने के दिन हैं,

गरेबान ढूँढ़ते हैं हाथ मेरे,
चमन में फूल खिल जाने के दिन हैं,

तुम्हे राज़-ऐ-मोहब्बत क्या बताएं,
तुम्हारे खेलने खाने के दिन हैं,

घटाएं ऊंदी ऊंदी कह रही है,
मए अंगूर खिच्वाने के दिन हैं,

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