कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

सितम्बर 19, 2007

तेरा चेहरा है आईने जैसा


तेरा चेहरा है आईने जैसा,
क्यो न देखू है देखने जैसा,

तुम कहो तो मैं पूछ लू तुमसे,
है सवाल एक पूछने जैसा,

दोस्त मिल जायेगे कई लेकिन,
न मिलेगा कोई मेरे जैसा,

तुम अचानक मिले थे जब पहले,
पल नही है वो भूलने जैसा,

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1 टिप्पणी »

  1. masha allah aaine sa chera

    टिप्पणी द्वारा mehek — नवम्बर 28, 2007 @ 2:03 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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