कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 4, 2007

दिल में अब दर्द-ऐ-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं


दिल में अब दर्द-ऐ-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं,
जिन्दगी मेरी इबादत के सिवा कुछ भी नहीं,

मैं तेरी बारगाह-ऐ-नाज़ में क्या पेश करूं,
मेरी झोली में मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं,

ऐ खुदा मुझ से न ले मेरे गुनाहों का हिसाब,
मेरे पास अश्क-ऐ-नदामत के सिवा कुछ भी नहीं,

वोह तो मिट कर मुझे मिल ही गयी राहत वर्ना,
जिन्दगी रंज-ओ-मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं,

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