कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 5, 2007

ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे


ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे,
यह छलकती हुयी आखो को भी पत्थर कर दे,

तुझ को देखा नही, महसूस किया है मैंने,
आ किसी  दिन मेरे अहसास को पय्कर कर दे,

और कुछ डर मुझे, डरकर नही है लकिन,
मेरी चादर मेरे पैरो के, बराबर कर दे,

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