कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 6, 2007

जहाँ जहाँ मुझे सेहरा दिखायी देता है


जहाँ जहाँ मुझे सेहरा दिखायी देता है,
मेरी तरह से अकेला दिखायी देता है,

यह एक अब्र का टुकडा कहाँ कहाँ बरसे,
तमाम दस्त ही प्यासा दिखायी देता है,

यह किस मकाम पे लाई है जुस्तजू तेरी,
जहाँ से अर्श भी नीचा दिखायी देता है..

मंज़िल न दे चराग न दे हौसला तो दे


मंज़िल न दे चराग न दे हौसला तो दे,
तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे,

मैंने ये कब कहा के मेरे हक में हो जवाब,
लेकिन खामोश क्यूँ है तू कोई फैसला तो दे,

बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फरेब,
मेरे खुदा कहाँ है तू अपना पता तो दे,

बेशक मेरे नसीब पे रख अपना इख्तियार,
लेकिन मेरे नसीब में क्या है बता तो दे,

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