कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 17, 2007

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं


जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं,

मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं,

हम ने देखा है कई ऐसे खुदाओं को यहाँ,
सामने जिन के वो सच मुच का खुदा कुछ भी नहीं,

या खुदा अब के ये किस रंग में आई है बहार,
ज़र्द ही ज़र्द है पेडो पे हरा कुछ भी नहीं,

दिल भी एक जिद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह,
या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं,

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2 टिप्पणियाँ »

  1. really much close to heart
    the thoughts are pretty deep inside from……….
    i just really can’t explain how much i’ve been attracted by it……………….
    amazing………….

    टिप्पणी द्वारा nirbhayendra — अक्टूबर 31, 2007 @ 5:48 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो,
    मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं,

    Sach hai ye ………………………kitni pyari line hai

    टिप्पणी द्वारा Sunil Verma — अक्टूबर 23, 2017 @ 12:23 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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