कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 19, 2007

तुम ये कैसे जुदा हो गए


तुम ये कैसे जुदा हो गए,
हर तरफ़ हर जगह हो गए,

अपना चेहरा न बदला गया,
आईने से खफा हो गए,

जाने वाले गए भी कहाँ,
चाँद सूरज घटा हो गए,

बेवफा तो न वो थे न हम,
यूं हुआ बस जुदा हो गए,

आदमी बनना आसान न था,
शेख जी आरसा हो गए,

चाक जिगर के सी लेते हैं


चाक जिगर के सी लेते हैं,
जैसे भी हो जी लेते हैं,

दर्द मिले तो सह लेते हैं,
अश्क मिले तो पी लेते हैं,

आप कहें तो मर जाएं हम,
आप कहें तो जी लेते हैं,

बेजारी के अंधीयारे में,
जीने वाले जी लेते हैं,

हम तो हैं उन फूलों जैसे,
जो कांटो में जी लेते हैं,

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