कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 19, 2007

तुम ये कैसे जुदा हो गए


तुम ये कैसे जुदा हो गए,
हर तरफ़ हर जगह हो गए,

अपना चेहरा न बदला गया,
आईने से खफा हो गए,

जाने वाले गए भी कहाँ,
चाँद सूरज घटा हो गए,

बेवफा तो न वो थे न हम,
यूं हुआ बस जुदा हो गए,

आदमी बनना आसान न था,
शेख जी आरसा हो गए,

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