कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 23, 2007

दिन आ गए शबाब के आँचल संभालिये


दिन आ गए शबाब के आँचल संभालिये,
होने लगी है शहर में हलचल संभालिये,

चलिए संभल संभल के कठिन राह-ऐ-इश्क है,
नाज़ुक बड़ी है आपकी पायल संभालिये,

सज धज के आप निकले सरे राह खैर हो,
टकरा न जाए आपका पागल संभालिये,

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ,
बरसेंगे जोर-जोर से बादल संभालिये,

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