कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 25, 2007

तुम करूणा के सागर हो प्रभु


तुम करूणा के सागर हो प्रभु,
मेरी गागर भर दो |
थके पांव है दूर गावं है ,
अब तो कृपा कर दो |

क्लेश-द्वेष से भरा ये मन है ,
मैला मेरा तन है |
तुम कृपाला दीनदयाला,
तुमसे ही जीवन है |
इस तन -मन को उपवन करने ,
का वरदान अमर दो |

याचक बनकर खड़ा हूँ द्वारे ,
दोनों हाथ मैं जोड़े |
परमपिता तुमको मैं जानू ,
पिता न बालक छोडे!
‘दास नारायण ‘ करे अर्चना ,
मेरी पीड़ा हर लो ||

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