कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 27, 2007

यूँ तो जाते हुए मैंने उसे रोका भी नही


यूँ तो जाते हुए मैंने उसे रोका भी नही,
प्यार उस से न रहा हो मुझे, ऐसा भी नही,

मुझको मंजिल की कोई फ़िक्र नही है य रब,
पर भटकता ही रहू जिस पे, वो रास्ता भी नही,

मुन्तजिर मे भी किसी शाम नही था उसका,
और वादे पे कभी शख्स वो आया भी नही,

जिसकी आहट पे निकल पड़ता था कल सीने से,
देख कर आज उसे दिल मेरा धड़का भी नही,

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5 टिप्पणियाँ »

  1. yeh blog dekh ke bahut hi accha laga …!!

    टिप्पणी द्वारा Tosha — अक्टूबर 28, 2007 @ 3:41 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  2. Hii,
    well itni pyaari lines hai…gorgeous….thanx a lot…. 🙂

    टिप्पणी द्वारा Payal — नवम्बर 2, 2007 @ 12:39 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. so much depth in these lines…

    टिप्पणी द्वारा mansi — नवम्बर 19, 2007 @ 5:20 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. Bahut sukuun milta hai in shabadon ko sunkar….
    Sab yaad aata hai jo ab hai hi nahi…
    kyun chale gaye mujhe chhodkar yu tanha

    टिप्पणी द्वारा Nikhil — नवम्बर 24, 2007 @ 1:06 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  5. Great!
    Very good,
    Ye he to gazals ki taakat hain.
    These lines are very good and i will write down it in my personal diary
    :-))

    टिप्पणी द्वारा manish joshi — मार्च 6, 2009 @ 6:09 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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