कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

अक्टूबर 30, 2007

यूं तो गुज़र रहा है हर इक पल खुशी के साथ


यूं तो गुज़र रहा है, हर इक पल खुशी के साथ,
फिर भी कोई कमी सी है, क्यों ज़िंदगी के साथ,

रिश्ते वफाये दोस्ती, सब कुछ तो पास है,
क्या बात है पता नही, दिल क्यों उदास है,
हर लम्हा है हसीन, नई दिलकशी के साथ,

चाहत भी है सुकून भी है दिल्बरी भी है,
आखों में खवाब भी है, लबो पर हसी भी है,
दिल को नही है कोई, शिकायत किसी के साथ,

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर,
अब और किस तलाश में बैचैन है नज़र,
कुदरत तो मेहरबान है, दरयादिली के साथ,

रात खामोश है चाँद मदहोश है


रात खामोश है चाँद मदहोश है,
थाम लेना मुझे जा रहा होश है,

मिलन की दास्ताँ धडकनों की जुबान,
गा रही है ज़मीन सुन रहा आसमान,

गुनगुनाती हवा दे रही है सदा,
सर्द इस रात की गर्म आगोश है,

महकती यह फिजा जैसे तेरी अदा,
छा रहा रूह पर जाने कैसा नशा,

झूमता है जहाँ अजब है यह समां,
दिल के गुलज़ार मे इश्क पुरजोश है,

The Rubric Theme. WordPress.com पर ब्लॉग.

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 47 other followers