कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 30, 2007

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई


तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गये,
उस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गये तड़पा भी गये,

एक अर्ज़-ए-वफ़ा भी कर न सके कुछ कह न सके कुछ सुन न सके,
यहां हम ने ज़बां ही खोले थी वहां आंख झुकी शरमा भी गये,

आशुफ़्तगी-ए-वहशत की क़सम हैरत की क़सम हसरत की क़सम,
अब आप कहे कुछ या न कहे हम राज़-ए-तबस्सुम पा भी गये,

रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्योंकर कहते,
एक हर्फ़ न निकला होठों से और आंख में आंसू आ भी गये,

अरबाब-ए-जुनूं पे फ़ुर्कत में अब क्या कहिये क्या क्या गुज़रा,
आये थे सवाद-ए-उल्फ़त में कुछ खो भी गये कुछ पा भी गये,

ये रन्ग-ए-बहार-ए-आलम है क्या फ़िक़्र है तुझ को ऐ साक़ी,
महफ़िल तो तेरी सूनी न हुई कुछ उठ भी गये कुछ आ भी गये,

इस महफ़िल-ए-कैफ़-ओ-मस्ती में इस अन्जुमन-ए-इरफ़ानी में,
सब जाम-ब-कफ़ बैठे रहे हम पी भी गये छलका भी गये,

Lyrics: Majaaz
Singer: Jagjit Singh

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ज़रा चेहरे से कमली को हटा दो या रसूल-अल्लाह


ज़रा चेहरे से कमली को हटा दो या रसूल-अल्लाह,
हमें भी अपना दीवाना बना दो या रसूल-अल्लाह,

मोहब्बत ग़ैर से मेरी छुड़ा दो या रसूल-अल्लाह,
मेरी सोई हुई क़िस्मत जगा दो या रसूल-अल्लाह,

बड़ी क़िस्मत हमारी है के उम्मत में तुम्हारी हैं,
भरोसा दीन-ओ-दुनिया में तुम्हारा या रसूल-अल्लाह,

अंधेरी कब्र में मुझको अकेला छोड़ जायेंगे,
वहां हो फ़ज़ल से तेरे उजाला या रसूल-अल्लाह,

ख़ुदा मुझको मदीने पे जो पहुँचाये तो बेहतर है,
के रोज़े पर ही दे दूंजां उजाकर या रसूल-अल्लाह,

Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

तुझे ढ़ूंढ़ता था मैं


तुझे ढ़ूंढ़ता था मैं चारसूं तेरी शान जल्लेजलाल हूं,
तू मिला क़रीब-ए-रग-ए-गुलूं तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

तेरी याद में है कली कली है चमन चमन में हुबल अली,
तू बसा है फूल में हू-ब-हू तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

तेरे हुक्म से जो हवा चली तो चटक के बोली कली कली,
है करीम तू रहीम तू तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

तेरा जलवा दोनों जहां में है तेरा नूर कोनोमकां में है,
यहां तू ही तू वहां तू ही तू तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

Singer: Jagjit Singh

तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहां बनाया


तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहां बनाया,
कैसी ज़मीं बनाई क्या आसमां बनाया,

मिट्टी से बेल फूटे क्या ख़ुशनुमा उग आये,
पहना के सब्ज़ ख़िल्लत उनको जवां बनाया,

सूरज से हमने पाई गर्मी भी रोशनी भी,
क्या खूब चश्मा तूने ए महरबां बनाया,

हर चीज़ से है उसकी कारीगरी टपकती,
ये कारख़ाना तूने कब रायबां बनाया,

Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

मदीने को जायें ये जी चाहता है


मदीने को जायें ये जी चाहता है,
मुक़द्दर बनायें ये जी चाहता है,

मदीने के आका दो आलम के मौला,
तेरे पास आयें ये जी चाहता है,

जहां दोनों आलम हैं महर-ए-तमन्ना,
वहां सर झुकायें ये जी चाहता है,

मोहम्मद की बातें मोहम्मद की सीरत,
सुनें और सुनायें ये जी चाहता है,

Singer: Chitra Singh

दुनिया से दिल लगाकर


दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा,
याद-ए-ख़ुदा किये जा तुझ को ख़ुदा मिलेगा,

दौलत हो या हुकूमत ताक़त हो या जवानी,
हर चीज़ मिटनेवाली हर चीज़ आनी-जानी,
ये सब ग़ुरूर इक दिन मिट्टी में जा मिलेगा,

आता नहीं पलटकर गुज़रा हुआ ज़माना,
क्या ख़्वाब का भरोसा क्या मौत का ठिकाना,
ये ज़िंदगी गंवाकर क्या फ़ायदा मिलेगा,

Singer: Jagjit Singh

चिराग दिल के जलाओ


चिराग दिल के जलाओ के ईद का दिन है,
तराने झूम के गाओ के ईद का दिन है,

ग़मों को दिल से भुलाओ के ईद का दिन है,
ख़ुशी से बज़्म सजाओ के ईद का दिन है,

हुज़ूर उस की करो अब सलामती की दुआ,
सर-ए-नमाज़ झुकाओ के ईद का दिन है,

सभी मुरादें हों पूरी हर एक सवाली की,
दुआ को हाथ उठाओ के ईद का दिन है,

Lyrics: Qateel Shifai
Singer: Jagjit Sing, Chitra Singh

अब तो मेरे खुदा मुझे जलवा दिखाइये


अब तो मेरे खुदा मुझे जलवा दिखाइये,
अपने नमाज़ियों का कहा मान जाइये,

कुछ कह रहे हैं आप से सीने की धड़कनें,
मेरा नहीं तो दिल का कहा मान जाइये,

मै जानता हूं तू बड़ा रहमतनवाज़ है,
सबके दिलों पे रहम का जादू जगाइये,

मुद्दत से तिशनगी है तुम्हारे जमाल की,
नूर-ए-कमाल से ज़रा परदा उठाइये,

Singer: Jagjit Singh, Chitra Singh

नवम्बर 29, 2007

दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो


दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो,
दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो,
दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो,

हाथ न आए, हाथ न आए,
हाथ न आए, वो आँचल हो,
दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो,

नूर मे डूबा, नूर मे डूबा,
नूर मे डूबा ताजमहल हो,
दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो,

रूप सलोना, रूप सलोना,
रूप सलोना, नीलकवल हो,
दर्द-ऐ-दिल हो एक ग़ज़ल हो,

Lyrics: Nadeem Parmar
Singer: Jaswinder Singh

आ तुझे दोस्त जान-ऐ-दिल कह दे


आ तुझे दोस्त जान-ऐ-दिल कह दे,
आ तेरे नाम एक ग़ज़ल कह दे,

सोचता हूँ के तेरी आंखो को,
झील कह दे या फिर कवल कह दे,

लब पे हल्की सी मुस्कुराहट को,
जिन्दगी कह दे या अजल कह दे,

इस तेरे पाक से बदन को नदी,
गंगा कह दे या गंगाजल कह दे,

Lyrics: Nadeem Parmar
Singer: Jaswinder Singh

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