कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 7, 2007

क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही


अपना अपना रास्ता है कुछ नही,
क्या भला है क्या बुरा है कुछ नही,
जुस्तजू है एक मुसलसल जुस्तजू,
क्या कही कुछ खो गया है कुछ नही,
मोहर मेरे नाम की हर शय पे है,
मेरे घर मे मेरा क्या है कुछ नही,
कहने वाले अपनी अपनी कह गए,
मुझसे पुछ क्या सुना है कुछ नही,
कोई दरवाजे पे है तो क्या हुआ,
आप से कुछ मांगता है कुछ नही,

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5 टिप्पणियाँ »

  1. मोहर मेरे नाम की हर शय पे है,
    मेरे घर मे मेरा क्या है कुछ नही,

    Waahhhhhhhhhhhh!!!!!
    रेत पर घर बने है लोगों के
    सहरा में किसका क्या है कुछ भी नहीं
    देवी

    टिप्पणी द्वारा Devi Nangrani — नवम्बर 8, 2007 @ 8:33 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  2. यह ग़ज़ल बहुत सुंदर है. काश आप कवि का नाम भी लिख दिया करें

    टिप्पणी द्वारा Dr S A R Hashmi — नवम्बर 13, 2007 @ 1:08 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. name of poet DR. AKHTAR NAZMI famous urdu poet of india.

    टिप्पणी द्वारा feeroz akhtar — मार्च 26, 2008 @ 11:49 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  4. for discussion on this ghazal or other ghazals from late. Dr. Akhtar Nazmi.. u can contact me on my mail… I’ll be obliged..

    टिप्पणी द्वारा Faaiz Nazmi — अप्रैल 15, 2009 @ 3:34 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  5. This is one of my favourit gazal written by my father Late Dr. Akhtar Nazmi. He is alive in his poetries 4 evr n evr!!!!

    टिप्पणी द्वारा Mr. Rizwan Nazmi — सितम्बर 14, 2012 @ 12:48 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया


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