कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 19, 2007

हुस्न वालो का ऐतराम करो


हुस्न वालो का ऐतराम करो,
कुछ तो दुनिया मे नेक काम करो,
शेख जी आये है बव्जू होकर,
अब तो पीने का इन्तेजाम करो,
अभी बरसेंगे हर तरफ़ जलवे,
तुम निगाहों का एह्त्माम करो,
लोग डरने लगे गुनाहों से,
बारिश-ऐ-रहमत-ऐ-तमाम करो,

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है


हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है,
जिंदा तो है जीने की अदा भूल गए है,
हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है,

खुशबु जो लुटाती है मसलती है उसी को,
एहसान का बदला यही मिलता है कली को,
एहसान तो लेते है सिला भूल गए है,

करते है मोहब्बत का और एहसान का सौदा,
मतलब के लिए करते है इमान का सौदा,
डर मौत का और खौफ-ऐ-खुदा भूल गए है,

अब मोम पिघल कर कोई पत्थर नही होता,
अब कोई भी कुर्बान किसी पर नही होता,
यू भटकते है मंजिल का पता भूल गए है,

इश्क क्या है


इश्क क्या है, इश्क इबादत,
इश्क है इमान,

इश्क जगाये, पत्थर में भी,
दिल में हो, जैसे अरमा,

इश्क में मरना, इश्क में जीना,
इश्क का दामन, छोड़ कभी न,

इश्क को जिसने, जान लिया है,
उसने रब को, मान लिया है,

इश्क में खुशियो का मौसम है,
इश्क में आंसू, इश्क में गम है,

इश्क में जो भी खोया,
खो देता, अपनी पहचान,

इश्क सफर है, इश्क मुसाफिर,
इश्क छिपा है, इश्क है जाहिर,

इश्क ग़ज़ल है, इश्क तराना,
इश्क का जादू, सदियों पुराना,

इश्क में दिल खिलते है,
यह दिल हो जाते विरान,

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