कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

नवम्बर 22, 2007

इश्क़ फ़ना का नाम है


इश्क़ फ़ना का नाम है इश्क़ में ज़िंदगी न देख,
जल्वा-ए-आफ़ताब बन ज़र्रे में रोशनी न देख,

शौक़ को रहनुमा बन जो हो चुका कभी न देख,
आग दबी हुई निकाल आग बुझी हुई न देख,

तुझ को ख़ुदा का वास्ता तू मेरी ज़िंदगी न देख,
जिसकी सहर भी शाम हो उसकी सियाहशवी न देख,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Chitra Singh

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1 टिप्पणी »

  1. इश्क़ फ़ना का नाम है इश्क़ में ज़िंदगी न देख,
    जल्वा-ए-आफ़ताब बन ज़र्रे में रोशनी न देख,

    शौक़ को रहनुमा बन जो हो चुका कभी न देख,
    आग दबी हुई निकाल आग बुझी हुई न देख,

    तुझ को ख़ुदा का वास्ता तू मेरी ज़िंदगी न देख,
    जिसकी सहर भी शाम हो उसकी सियाहशवी न देख,

    टिप्पणी द्वारा buddha — फ़रवरी 15, 2010 @ 4:27 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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