कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 1, 2007

तेरे कदमो पे सर होगा


तेरे कदमो पे सर होगा, कजा सर पे खडी होगी,
फिर उस सजदे का क्या कहना अनोखी बन्दगी होगी,

नसीम-ए-सुबह गुनशन में गुलो से खेलती होगी,
किसी की आखरी हिच्चकी किसी की दिल्ल्गी होगी,

दिखा दुँगा सर-ए-महफिल, बता दुँगा सर-ए-महशिल,
वो मेरे दिल में होगें और दुनिया देखती होगी,

मजा आ जायेगा महफ़िल में फ़िर सुनने सुनाने का,
जुबान होगी वहाँ मेरी कहानी आप की होगी,

तुम्हे दानिश्ता महफ़िल में जो देखा हो तो मुजरिम,
नजर आखिर नजर है बेइरादा उठ गई होगी,

Lyrics: Seemab Akbarabadi
Singer: Jagjit Singh

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1 टिप्पणी »

  1. मजा आ जायेगा महफ़िल में फ़िर सुनने सुनाने का,
    इस पंक्ति में, ‘महफ़िल’ गलत है, सही शब्द ‘महशिर’
    इस्से ऊपर भी ‘बता दुँगा सर-ए-महशिल,’ , सही शब्द ‘महशिर’ है।

    टिप्पणी द्वारा Apoorve Gaur — नवम्बर 17, 2017 @ 10:09 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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