कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 6, 2007

नज़र वो है के


नज़र वो है के जो कौन-ओ-मकां के पार हो जाये,
मगर जब रू-ए-ताबां पर पड़े बेकार हो जाये,

नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो आख़िर किस तरह ठहरे,
कभी जो फूल बन जाये कभी रुख़सार हो जाये,

चला जाता हूं हंसता खेलता मौज-ए-हवादिस से,
अगर आसानियां हों ज़िंदगी दुशवार हो जाये,

Lyrics: Asghar Gondavi
Singer: Jagjit Singh

मुद्दत में वो फिर


मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाक़ात का आलम,
ख़ामोश अदाओं में वो जज़्बात का आलम,

अल्लाह रे वो शिद्दत-ए-जज़्बात का आलम,
कुछ कह के वो भूली हुई हर बात का आलम,

आरिज़ से ढ़लकते हुए शबनम के वो क़तरे,
आँखों से झलकता हुआ बरसात का आलम,

वो नज़रों ही नज़रों में सवालात की दुनिया,
वो आँखों ही आँखों में जवाबात का आलम,

Lyrics: Jigar Moradabadi
Singer: Jagjit Singh

किस को आती है मसीहाई


किस को आती है मसीहाई किसे आवाज़ दूं,
बोल ऐ ख़ूंख़ार तनहाई किसे आवाज़ दूं,

चुप रहूं तो हर नफ़स ड़सता है नागन की तरह,
आह भरने में है रुसवाई किसे आवाज़ दूं,

उफ़ ख़ामोशी की ये आहें दिल को बरमाती हुईं,
उफ़ ये सन्नाटे की शहनाई किसे आवाज़ दूं,

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

बोल इकतारे झन झन


बोल इकतारे झन झन झन झन,

काहकशां है मेरी सुंदन,
शाम की सुर्ख़ी मेरा कुंदन,
नूर का तड़का मेरी चिलमन,
तोड़ चुका हूं सारे बंधन,
पूरब पच्छम उत्तर दक्खन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

मेरे तन में गुलशन सबके,
मेरे मन में जोबन सबके,
मेरे घट में साजन सबके,
मेरी सूरत दर्शन सबके,
सबकी सूरत मेरा दर्शन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

सब की झोली मेरी खोली,
सब की टोली मेरी टोली,
सब की होली मेरी होली,
सब की बोली मेरी बोली,
सब का जीवन मेरा जीवन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

सब के काजल मेरे पारे,
सब की आँखें मेरे तारे,
सब की साँसें मेरे धारे,
सारे इंसां मेरे प्यारे,
सारी धरती मेरा आंगन,
बोल इकतारे झन झन झन झन,

Lyrics: Josh Malihabadi
Singer: Jagjit Singh

ऐ वतन मेरे वतन


ऐ वतन मेरे वतन रूह-ए-रवानी-ए-एहराब,
ऐ के ज़र्रों में तेरे बू-ए-चमन रंग-ए-बहार,
रेज़े अल्मास के तेरे खस-ओ-ख़ाशाक़ में हैं,
हड़्ड़ियां अपने बुज़ुर्गों की तेरी ख़ाक में हैं,
तुझ से मुँह मोड़ के मुँह अपना दिखयेंगे कहां,
घर जो छोड़ेंगे तो फिर छांव निछायेंगे कहां,
बज़्म-ए-अग़यार में आराम ये पायेंगे कहां,
तुझ से हम रूठ के जायेंगे तो जायेंगे कहां,

Lyrics: Jigar Moradbadi
Singer: Jagjit Singh

अब तो उठ सकता नहीं


अब तो उठ सकता नहीं आंखों से बार-ए-इन्तज़ार,
किस तरह काटे कोई लैल-ओ-नहार-ए-इन्तज़ार,

उन की उल्फ़त का यक़ीं हो उन् के आने की उम्मीद,
हों ये दोनों सूरतें तब है बहार-ए-इन्तज़ार,

मेरी आहें नारासा मेरी दुआऐं नाक़ुबूल,
या इलाही क्या करूं मै शर्मसार-ए-इन्तज़ार,

उन के ख़त की आराज़ू है उन के आमद का ख़याल,
किस क़दर फैला हुआ है कारोबार-ए-इन्तज़ार,

Lyrics: Hasrat Mohani
Singer: Chitra Singh

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