कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 6, 2007

ऐ वतन मेरे वतन


ऐ वतन मेरे वतन रूह-ए-रवानी-ए-एहराब,
ऐ के ज़र्रों में तेरे बू-ए-चमन रंग-ए-बहार,
रेज़े अल्मास के तेरे खस-ओ-ख़ाशाक़ में हैं,
हड़्ड़ियां अपने बुज़ुर्गों की तेरी ख़ाक में हैं,
तुझ से मुँह मोड़ के मुँह अपना दिखयेंगे कहां,
घर जो छोड़ेंगे तो फिर छांव निछायेंगे कहां,
बज़्म-ए-अग़यार में आराम ये पायेंगे कहां,
तुझ से हम रूठ के जायेंगे तो जायेंगे कहां,

Lyrics: Jigar Moradbadi
Singer: Jagjit Singh

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