कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 8, 2007

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है


चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है,
हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है,

बाहज़ारां इज़्तिराब-ओ-सदहज़ारां इश्तियाक,
तुझसे वो पहले पहल दिल का लगाना याद है,

तुझसे मिलते ही वो कुछ बेबाक हो जाना मेरा,
और तेरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है,

खींच लेना वो मेरा पर्दे का कोना दफ़्फ़ातन,
और दुपट्टे से तेरा वो मुँह छिपाना याद है,

जानकर सोता तुझे वो क़सा-ए-पाबोसी मेरा,
और तेरा ठुकरा के सर वो मुस्कुराना याद है,

तुझ को जब तन्हा कभी पाना तो अज़राह-ए-लिहाज़,
हाल-ए-दिल बातों ही बातों में जताना याद है,

जब सिवा मेरे तुम्हारा कोई दीवाना ना था,
सच कहो क्या तुम को भी वो कारखाना याद है,

ग़ैर की नज़रों से बचकर सब की मर्ज़ी के ख़िलाफ़,
वो तेरा चोरीछिपे रातों को आना याद है,

आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्र-ए-फ़िराक़,
वो तेरा रो-रो के मुझको भी रुलाना याद है,

दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिये,
वो तेरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है,

देखना मुझको जो बर्गश्ता तो सौ सौ नाज़ से,
जब मना लेना तो फिर ख़ुद रूठ जाना याद है,

चोरी चोरी हम से तुम आकर मिले थे जिस जगह,
मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है,

बेरुख़ी के साथ सुनाना दर्द-ए-दिल की दास्तां,
और तेरा हाथों में वो कंगन घुमाना याद है,

वक़्त-ए-रुख़सत अलविदा का लफ़्ज़ कहने के लिये,
वो तेरे सूखे लबों का थरथराना याद है,

बावजूद-ए-इद्दा-ए-इत्तक़ा ‘हसरत’ मुझे,
आज तक अहद-ए-हवस का ये फ़साना याद है,

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Hasrat Mohani
Singer: Jagjit Singh

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47 टिप्पणियाँ »

  1. bhut sundar rachna hai ye jo jagjit ji bhut ache se ham tak pahunchayi…….

    टिप्पणी द्वारा hemjyotsana parashar — जून 19, 2007 @ 3:07 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  2. yeh gajal mein aksar rozana sunti hun vo bhi puri…actually original gazal Pkistaan ke Mashoor Gazal gayak Gulam Ali ji ke hai…

    टिप्पणी द्वारा KEERTI VAIDYA — दिसम्बर 8, 2007 @ 1:37 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  3. khubsurat ghazal aur wo bhi lines jo hume pata nahi thi kuch kuch,aap ka shukriya,itni aachi peshkash ke liye.

    टिप्पणी द्वारा mehhekk — दिसम्बर 9, 2007 @ 8:05 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  4. really nice lyrics of this song n music is also too gud. over all presentation of this song is awesome. no words are present for me to describe for such a beautiful song, which express the true feeling of luv.

    टिप्पणी द्वारा kirti kapoor — अक्टूबर 2, 2008 @ 8:33 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  5. विजय कुमार पाठक ग्राम मठिया पोस्ट बोदरवार जिला कुशीनगर उ0 प्र0 पिनकोड 274149

    टिप्पणी द्वारा विजय कुमार पाठक — फ़रवरी 26, 2009 @ 10:34 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  6. काफी दिन से इस गजल को ढूँढ रहे थे धन्य हो गुलाम अली साहब

    टिप्पणी द्वारा विजय कुमार पाठक — फ़रवरी 26, 2009 @ 10:38 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  7. ;> muddat se koi gum paas nahi hai.
    tanhai ka bhi koi ehsas nahi hai,
    akele hi aaye hai jab duniya me,
    fir kyu ye gila hai ke koi mere sath nahi hai.
    ;> Har aahat pe teri talash hai, door reh kar bhi tu mere paas hai, Na yaad karo itna ki hamara dil humse puche DHADKAN teri kiske paas hai.
    ;> Wo yaro ki mehfil, wo muskrate pal,
    Dil se juda hai apna bita hua kal,
    kabhi zindgi guzrti thi hasne hasaane me,
    AaJ waqt guzrta hai Kagaj K tukde kamane me!
    ;> Rishta hamara is jahan me sabse pyara ho,
    jaise zindgi ko sanso ka sahara ho,
    yaad karna mujhe us pal me,
    jab tum akele ho,aur koi na tumhara ho.
    ;> pathhar ki ye dunia jajbaat nahi samajhti, dil me kya hai wo baat nahi samajhti, tanha to chand bhi rahta hai sitaro k beech, magar chand ka dard bewafa raat bhi nahi satajhti. DSNL
    ;> chand utra tha hamare aangan me, sitaro ko gawara na tha, hum to sitaro se bhi bagawat kar lete, per kya karte, jab chand hi hamara na tha. DSNL

    टिप्पणी द्वारा कुसुम शर्मा — फ़रवरी 26, 2009 @ 1:44 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  8. बहुत अच्छा गजल है

    टिप्पणी द्वारा माधुरी — मार्च 1, 2009 @ 8:36 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  9. यार आपलोग इतनी अच्छी शेरो शायरी कैसे लिख लेते हैँ? विजय कुमार पाठक
    ग्राम-मठिया
    पोस्ट-बोदरवार
    जिला-कुशीनगर उ0 प्र0
    पिनकोड-274149

    टिप्पणी द्वारा विजय कुमार पाठक — मार्च 26, 2009 @ 8:08 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  10. its really very nice ghazal but infact this ghazal sang by MR.GHULAM ALI.
    he is a very nice singer and MR.JAGJEET SINGH IS ALSO MY FAVOURITE ONE.
    Specially wo ghazal “mujhko yakeen hai
    -koi ye kaise bataye,
    aur ghulam ali sahab ne kya khub gaya hai “HUM TERE SAHER ME AYE HAI MUSAFIR KI TARAH”
    “GHAM HAI YA KHUSHI HAI TU…………..”
    THANKS TO U.
    MY REQUEST IS PROVIDE THE INSTRUMENTAL PART OF TWO SONGS:
    Viz..1.Chupke chupke
    2.Hum tere saher me aye hai.
    THANKS AGAIN……………………………………………………………..-%%%%.RAJ%%%%

    टिप्पणी द्वारा RAJ SAGAR — अप्रैल 19, 2009 @ 7:41 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  11. वाह राज साहब ! आप तो गुलाम अली साहब के वास्तव मेँ अच्छे फैन हैँ ।

    VIJAY KUMAR PATHAK
    VILL-MATHIYA
    POST-BODARWAR
    DIST-KUSHINAGAR
    STATE-U. P. (INDIA)
    PINCODE-274149

    विजय कुमार पाठक
    ग्राम-मठिया
    पोस्ट-बोदरवार
    जिला-कुशीनगर उ0 प्र0
    पिनकोड-274149

    E-mail :
    dsnlindia@gmail.com
    vpathak71@yahoo.com

    टिप्पणी द्वारा विजय कुमार पाठक — जून 8, 2009 @ 6:20 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  12. Very good mind blowing
    S K Ojha
    Jaisinghpur
    Sultanpur

    टिप्पणी द्वारा Sanjeev Ojha — सितम्बर 18, 2009 @ 3:45 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  13. Rudra Prakash Singh
    Vill-Sekhpurwa
    Post-Bodarwar
    Dist-Kushinagar (UP)
    pincode-274149

    टिप्पणी द्वारा rudra prakash singh — मार्च 7, 2010 @ 8:20 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  14. RAJ SIR YOU ARE GREAT

    टिप्पणी द्वारा VIRENDRA VARMA — दिसम्बर 25, 2010 @ 6:28 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  15. […] The famous Ghazal, Chupke Chupke Raat Din Aansoon Bahana Yaad Hai […]

    पिंगबैक द्वारा 20 (18+2) Writers of Indian interest entering Public Domain this New Year « Booknomics — जनवरी 2, 2012 @ 10:24 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

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    टिप्पणी द्वारा place zabaw — मार्च 25, 2014 @ 2:03 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

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  43. Badawcze spojrzenie na historię, każdy powinien rozczytać
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    टिप्पणी द्वारा oprogramowanie call center — अप्रैल 6, 2014 @ 2:06 अपराह्न | प्रतिक्रिया

  44. I seldom write remarks, but I read a great deal of comments on this page चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना
    याद है | कुछ पल जगजीत सिंह के
    नाम. I actually do have 2 questions for you if you do not mind.

    Is it only me or does it appear like a few of these comments appear like they are left by brain dead individuals?
    😛 And, if you are posting at other online sites, I’d like to
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    टिप्पणी द्वारा люминофорная краска купить — मई 22, 2014 @ 3:04 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  45. Niezwykłe spojrzenie na sprawę, każdy powinien przeczytać dodatkowo
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    टिप्पणी द्वारा system call center — जून 8, 2014 @ 8:53 पूर्वाह्न | प्रतिक्रिया

  46. […] The famous Ghazal, Chupke Chupke Raat Din Aansoon Bahana Yaad Hai […]

    पिंगबैक द्वारा 20 (18+2) Writers of Indian interest entering Public Domain this New Year | Booknomics — जून 21, 2014 @ 11:33 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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