कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 8, 2007

हमदम यही है


इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम,
हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम,

क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे क्या कहें,
वो राज़-ए-दिल जो कह न सके राज़दां से हम,

हमदम यही है रहगुज़र-ए-यार-ए-खुश-खिराम,
गुज़रे हैं लाख बार इसी कहकशां से हम,

क्या क्या हुआ है हम से जुनूं में न पूछिये,
उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमां से हम,

ठुकरा दिये हैं अक़्ल-ओ-खिराद के सनमकदे,
घबरा चुके हैं कशमकश-ए-इम्तेहां से हम,

बख्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुर्रतें ’मजाज़’,
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहां से हम,

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Majaz
Singer: Jagjit Singh & Chorus

1 टिप्पणी »

  1. बहुत सुंदर गज़ल पर बहुत से शब्द समझ में नही आये उनका मतलब बता देंगे तो अच्छा होगा । इज्न ए खिराम, फ्राश
    क्या क्या हुआ है हम से जुनूं में न पूछिये,
    उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमां से हम,
    पसंद आया ।

    टिप्पणी द्वारा Asha Joglekar — दिसम्बर 8, 2007 @ 4:47 अपराह्न | प्रतिक्रिया


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