कुछ पल जगजीत सिंह के नाम

दिसम्बर 19, 2007

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई


तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गए
इस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गए तड़पा भी गए

हम अर्ज़-ए-वफ़ा भी कर ना सके कुछ कह ना सके कुछ सुन ना सके
यां हम ने ज़बां ही खोले थी वां आँख झुकी शरमा भी गए

आशुफ़्तगी-ए-वहशत की क़सम हैरत की क़सम हसरत की क़सम
अब आप कहें कुछ या ना कहें हम राज़-ए-तबस्सुम पा भी गए

रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्योंकर कहते
एक हर्फ़ ना निकला होठों से और आंख में आंसू आ भी गए

अरबाब-ए-जुनूं पे फ़ुरकत में अब क्या कहिये क्या क्या गुज़रा
आये थे सवाद-ए-उल्फ़त में कुछ खो भी गए कुछ पा भी गए

ये रंग-ए-बहार-ए-आलम है क्या फ़िक़्र है तुझ को ऐ साक़ी
महफ़िल तो तेरी सुनी ना हुई कुछ उठ भी गए कुछ आ भी गए

इस महफ़िल-ए-कैफ़-ओ-मस्ती में इस अंजुमन-ए-इरफ़ानी में
सब जाम-ब-कफ़ बैठे ही रहे हम पी भी गए छलका भी गए

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Majaz
Singer: Jagjit Singh

रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे


रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे
सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे

खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़्वाब आएगा
अपना अरमान बर-अफ़्गंदा नक़ाब आएगा

नज़रें नीची किये शर्माए हुए आएगा
काकुलें चेहरे पे बिखराए हुए आएगा

आ गई थी दिल-ए-मुज़्तर में शकेबाई सी
बज रही थी मेरे ग़मखाने में शहनाई सी

शब के जागे हुए तारों को भी नींद आने लगी
आप के आने की इक आस थी अब जाने लगी

सुबह ने सेज से उठते हुए ली अंगड़ाई
ओ सबा तू भी जो आई तो अकेले आई

मेरे महबूब मेरी नींद उड़ानेवाले
मेरे मसजूद मेरी रूह पे छानेवाले

आ भी जा ताकि मेरे सजदों का अरमां निकले

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Makhdoom Moiuddin
Singer: Jagjit Singh, Asha Bhosle

किसी का यूं तो हुआ कौन


किसी का यूं तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी
ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी

हज़ार बार ज़माना इधर से गुज़रा है
नई नई सी है कुछ तेरी रहगुज़र फिर भी

तेरी निगाह से बचने में उम्र गुज़री है
उतर गया रग-ए-जां में ये नेशतर फिर भी

Lyrics: Firaq Gorakhpuri
Singer: Jagjit Singh

इश्क़ के शोले को भड़काओ


इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे
दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे

हिज्र में मिलने शब-ए-माह के गम आये हैं
चारासाजों को भी बुलवाओ कि रात कटे

कोई जलता ही नहीं कोई पिघलता ही नहीं
मोम बन जाओ पिघल जाओ कि कुछ रात कटे

चश्म-ओ-रुखसार के अज़गार को जारी रखो
प्यार के नग़मे को दोहराओ कि कुछ रात कटे

आज हो जाने दो हर एक को बद्-मस्त-ओ-ख़राब
आज एक एक को पिलवाओ कि कुछ रात कटे

कोह-ए-गम और गराँ और गराँ और गराँ
गमज़दों तेश को चमकाओ कि कुछ रात कटे

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Makhdoom Mohiuddin
Singer: Jagjit Singh

ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात


ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात
नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात

नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है
नवा-ए-दर्द सुनाओ बड़ी उदास है रात

उदासियों के जो हमराज़-ओ-हमनफ़स थे कभी
उन्हें ना दिल से भुलाओ बड़ी उदास है रात

जो हो सके तो इधर की राह भूल पड़ो
सनमक़दे की हवाओं बड़ी उदास है रात

कहें न तुमसे तो फ़िर और किससे जाके कहें
सियाह ज़ुल्फ़ के सायों बड़ी उदास है रात

अभी तो ज़िक्र-ए-सहर दोस्तों है दूर की बात
अभी तो देखते जाओ बड़ी उदास है रात

दिये रहो यूं ही कुछ देर और हाथ में हाथ
अभी ना पास से जाओ बड़ी उदास है रात

सुना है पहले भी ऐसे में बुझ गये हैं चिराग़
दिलों की ख़ैर मनाओ बड़ी उदास है रात

समेट लो कि बड़े काम की है दौलत-ए-ग़म
इसे यूं ही न गंवाओ बड़ी उदास है रात

इसी खंडहर में कहीं कुछ दिये हैं टूटे हुए
इन्ही से काम चलाओ बड़ी उदास है रात

दोआतिशां न बना दे उसे नवा-ए-‘फ़िराक़’
ये साज़-ए-ग़म न सुनाओ बड़ी उदास है रात

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Firaq Gorakhpuri
Singer: Jagjit Singh

एक चमेली के मंड़वे तले


एक चमेली के मंड़वे तले
मैकदे से ज़रा दूर
उस मोड़पर…
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए

प्यार हर्फ़-ए-वफ़ा
प्यार उनका ख़ुदा
प्यार उनकी चिता
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए

ओस में भीगते चांदनी में नहाते हुए
जैसे दो ताज़ा रु ताज़ा दम फूल पिछले पहर
ठंड़ी ठंड़ी सुबुक रौ चमन की हवा सर्फ़-ए-मातम हुई
काली काली लटों से लिपट गर्म रुख़सार पर एक पल के लिये रुक गई

हमने देखा उन्हे
दिन में और रात में
नूर-ओ-ज़ुल्मात में
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए

मस्जिदों के मुनारों ने देखा उन्हे
मंदिरों के किवड़ों ने देखा उन्हे
मैकदे की दरारों ने देख उन्हे
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए

अज़ अज़ल ता अबद
ये बता चाराग़र
तेरी ज़ंबील में
नुस्ख़ा-ए-कीमिया-ए-मोहब्बत भी है
कुछ इलाज-ओ-दावा-ए-उल्फ़त भी है
दो बदन…
दो बदन……
दो बदन प्यार की आग में जल गए
दो बदन प्यार की आग में जल गए
दो बदन प्यार की आग में जल गए

Unsung lines in Bold Italic

Lyrics: Makhdoom Mohiuddin
Singer: Jagjit Singh

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